Pravachan 1 August 2020

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🙏🌹राधे राधे जी🙏🌹
जीवन में देने की इच्छा करो, परमात्मा तुम्हारी झोली उसीसे भर देगा जो तुम देना चाहते थे। तुम लोगो को खुशियां देने की शुद्ध इच्छा रखोगे, तुम्हारे जीवन में खुशियों की बरसात होगी। तुम लोगो को सुख देने की शुद्ध इच्छा रखोगे, परमात्मा तुम्हे सुखी कर देगा । तुम लोगों में धन बाँटने की शुद्ध इच्छा करोगे, परमात्मा तुम्हारे ऊपर धन की बरसात कर देगा। तुम लोगो में प्रेम बाँटने की शुद्ध इच्छा रखोगे.परमात्मा तुम्हारे ऊपर प्रेम की झड़ी लगा देगा। तुम जीवन में आत्मीयता बाँटने की इच्छा रखोगे, परमात्मा तुम्हे आत्मीयता से भर देगा। तुम दूसरे बच्चों को सुखी रखने की शुद्ध इच्छा रखोगे, परमात्मा तुम्हारे बच्चों को सुखी रखेगा। तुम जीवन में आदर पाना चाहते हो तो जीवन में दुसरो को आदर दो। जीवन में तुम केवल दूसरों में बाँटने की इच्छा रखो, तुम्हे जीवन में सबकुछ मिल जायेगा ।अगर तुम अपने माता पिता की सेवा करोगे तो भविष्य में बच्चे भी तुम्हारी सेवा करेंगे।तुम अपने माता पिता की आत्मा दुखाओगे तो भविष्य में बच्चे भी तुम्हारी आत्मा दुखायेगें।जो फसल खाना चाहते हैं वहीं उगाये।

राधे राधे जी।🙏
[: दुःख के प्रमुख कारण बाहरी परिस्थितियाँ, आसपास के व्यक्तियों का व्यवहार, महत्वाकांक्षाएँ एवं कामनाएँ हैं। जीवन में आई प्रतिकूल परिस्थितियों एवं समस्याओं के लिए कोई दूसरा व्यक्ति या भाग्य दोषी नहीं है। उसके लिए हम स्वयं ही जिम्मेदार हैं, हमारे कर्मों और व्यवहार की वजह से ही परिस्थितियाँ निर्मित होती हैं। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि सामने वाले व्यक्ति का व्यवहार हमारे व्यवहार को प्रभावित न करें। हम अपने स्वभाव और विवेक के अनुकूल क्रिया करें।। और अपने कर्तव्य कर्म को करते हुए भगवान में विश्वास पक्का रखे कि मैं वर्तमान स्थिति को समझ नही पा रहा हूँ। लेकिन भगवान जो करेंगे अच्छा करेंगे।।
[: माना कि जीवन का उद्देश्य परम शांति को प्राप्त करना है,मगर बिना संघर्ष के जीवन में शांति की प्राप्ति हो पाना कदापि सम्भव नहीं है। शांति मार्ग नहीं अपितु लक्ष्य है। बिना संघर्ष पथ के इस लक्ष्य तक पहुँचना असम्भव है।। जो लोग पूरे दिन को सिर्फ व्यर्थ की बातों में गवाँ देते हैं वे रात्रि की गहन निद्रा के सुख से भी वंचित रह जाते हैं। मगर जिन लोगों का पूरा दिन एक संघर्ष में, परिश्रम में, पुरुषार्थ में गुजरता है वही लोग रात्रि में गहन निद्रा और गहन शांति के हकदार भी बन जाते हैं।। जीवन भी ठीक ऐसा ही है। यहाँ यात्रा का पथ जितना विकट होता है।। लक्ष्य की प्राप्ति भी उतनी ही आनंद दायक और शांति प्रदायक होती है। मगर याद रहे लक्ष्य श्रेष्ठ हो, दिशा सही हो और प्रयत्न में निष्ठा हो फिर आपके संघर्ष की परिणिति परम शांति ही होने वाली है।। ईश्वर के न्याय की चक्की धीमी जरूर चलती है। पर पीसती बहुत बारीक हैं।।

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