Shree Nagchandrashwar Temple Ujjain

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  • 0
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मन्दिर,साल में सिर्फ एक दिन खुलता है यह अद्भुत मंदिर, नागदेव के होते हैं दर्शन!!!!!!!•

नागों की पूजा करने की परंपरा हिंदू धर्म में सदियों से चली आ रही है। इन्हें भगवान का आभूषण माना गया है। यूं तो भारत में नागों के कई मंदिर हैं, लेकिन इनमें से एक उज्जैन के नागचंद्रेश्वर की कहानी अद्भुत है। उज्जैन में महाकाल के तीसरी मंजिल पर स्तिथ इस मंद्दिर कि खासियत यह है कि ये मंदिर साल में बस एक दिन और वो भी नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही खुलता है। उसी दिन इस मंदिर में भक्तों को नागदेवता के दर्शन हो पाते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस दिन नागराज खुद मंदिर में मौजूद रहते हैं।

कहा जाता है कि जो प्रतिमा यहां है वो दुनिया में कहीं और नहीं है। इस प्रतिमा को नेपाल से यहां लाया गया था। नागचंद्रेश्वर मंदिर की ये प्रतिमा 11वीं शताब्दी की है। इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। मान्यताएं तो यहां तक हैं कि पूरी दुनिया में यही एक ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं। मंदिर में जो प्राचीन मूर्ति स्थापित है उस पर शिवजी, गणेशजी और मां पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं। यह प्रतिमा मराठाकालीन कला का उत्कृष्ट नमूना है। यह प्रतिमा शिव-शक्ति का साकार रूप है।

सर्पराज तक्षक ने की थी घोर तपस्या!!!!!!!

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिवशंकर को मनाने के लिए सर्पराज तक्षक ने घोर तपस्या की थी। तपस्या से भोलेनाथ खुश हुए और फिर उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को वरदान के रूप में अमरत्व दिया। कहा जाता है कि उसके बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया।

यह मंदिर बहुत पुराना है। कहते हैं कि है परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी के आस-पास इस मंदिर को बनवाया था। फिर 1732 में सिं‍धिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया ने महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। उसी वक़्त इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार हो गया।

दर्शन के बाद सर्पदोष से मुक्त हो जाते हैं लोग!!!!!!

कहते हैं कि जिसने भी इस मंदिर में दर्शन कर लिए वो सर्पदोष से मुक्त हो जाता है। इसे देखते हुए जब नागपंचमी के दिन ये मंदिर खुलता है तो मंदिर के बाहर भक्तों की काफी भीड़ होती है। सभी इसी उम्मीद में आते हैं कि एक बार उन्हें नागराज पर विराजे शिवशंभु के दर्शन मिल जाए। नागपंचमी के दिन यहां लगभग चार लाख से ज्यादा भक्त नागदेव के दर्शन करते हैं।

      

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

20 − 20 =

Related Posts

Story of Shree Virbhadra

Spread the love          Tweet     भगवान शंकर के दो गणों , पहले गण वीरभद्र एवं दूसरे गण कालभैरव !!!!! शिव का रोद्र रूप वीरभद्र : – यह अवतार तब हुआ था जब ब्रह्मा

Laxmi and Broom

Spread the love          Tweet     झाड़ू में धन की देवी महालक्ष्मी का वास 〰️〰️🌼〰️〰️🌼🌼〰️〰️🌼〰️〰️ पौराणिक शास्त्रों में कहा गया है कि जिस घर में झाड़ू का अपमान होता है वहां धन हानि होती

Information about Bhoot Pret

Spread the love          Tweet     INFOMATION ABOUT BHOOT PRET (ACCORDING TO SCIENCE OR LOGICALLY )भूत-प्रेत के नाम से एक अनजाना भय लोगो की मन को सताता है। इसके किस्से भी सुनने को मिल