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अदरक

अदरक इन दिनों बहुतायत से मिलता है। हम सभी इसका प्रतिदिन उपयोग भी करते हैं, चाय में या सब्जियों के बघार में। लेकिन इसके बहुत से गुणों से अनभिज्ञ हैं। अंग्रेजी में इसे जिंजर कहते हैं। हमारे प्राचीन आयुर्वेद के ग्रंथों में इसके अनेक औषधि गुणों का जिक्र मिलता है। अदरक को सूखा कर बनी सोंठ तो अनेक आयुर्वेदिक दवाओं का खास तत्व है। अब इसके गुण देखिए-
किन-किन रोगों में उपयोगीः आर्थराइटिस में आराम देता है, रक्त पतला करता है, कोलेस्ट्रोल कम करता है, चिंतानाशक है, मितली रोकता है, अपच और अतिसार(डायरिया) में भी उपयोगी, भूख बढ़ाता है, पेटदर्द में उपयोगी, कब्ज मिटाता है, लार(सलाइवा) में वृद्धि करता है, स्कीन कैंसर और ओवेरियन कैंसर में उपयोगी, गर्भावस्था की मितली में भी दिया जाता है, कफनाशक है, सर्दी-जुकाम दूर करता है, एनालजेसिक, सेडेटिव, एंटीपायरेटिक और एंटीबेक्टिरियल गुणों से भरपूर है। हृदय के लिए बलकारक है, अल्पायु में अगर वृद्धावस्था के चिन्ह आ गए हों तो अदरक के नियमित सेवन से दूर होते हैं।
कहाँ कैसे उपयोगः बर्मा में अदरक और पाम ट्री का ज्यूस फ्लू में दिया जाता है। चीन में सर्दी-जुकाम के लिए अदरक, ब्राउन शुगर को पका कर काढ़ा दिया जाता है। इंडोनेशिया में थकान मिटाने, रुमेटिज्म, भूख बढ़ाने और रक्तवायु नाशक के रूप में बहुतायत से प्रयुक्त होता है। फिलीपींस वासी सोर थ्राट(गले की खराश मिटाने) के लिए अक्सर प्रयुक्त करते हैं। भारत में सर्दी-जुकाम में अदरक की चाय और काढ़ा पीने का आम रिवाज है। सिरदर्द में इसका रस कनपट्टी पर दोनों ओर लगाते हैं। कुछ देशों में जिंजर बीयर मिलती है, जो उदररोगों में मुफीद मानी जाती है।
सर्दी जुकाम व खाँसी मेंः अदरक को छील कर उसका एक टुकड़ा मुँह में रख कर धीरे-धीरे चूसते रहें। बहुत आराम मिलेगा और कफ को पतला कर निकालने में सहायता करेगा। रात को सोते वक्त अगर अदरक का एक टुकड़ा मुँह में रख सोएं तो सुबह उठने पर मुँह और गला बिल्कुल साफ मिलेंगे। खाँसी में अदरक का रस शहद के साथ लेने से भी लाभ होता है।
दस्त लगने परः अदरक का रस नाभी के चारों ओर लगालें। अदरक के रस में रुई का एक फाया भिगो कर नाभी पर कुछ देर रखने से बहुत आराम मिलता है, दस्त बंद हो जाते हैं।
दर्द नाशकः हाथ पैरों के दर्द में अदरक पीस कर इसका लेप लगाने से आराम मिलता है।
पाचन के लिएः यह आमाशय में पाचक रस की वृद्धि करता है। इसके सेवन से भोजन का परिपाक उत्तम होता है। भोजन के पूर्व अगर अदरक के बारीक टुकड़े, काला नमक और नींबू निचोड़ कर लिए जाएं तो भूख खुल कर लगती है। अगर पाचन ठीक होने लगेगा तो शरीर स्वस्थ और काया अपने आप सुंदर होने लगेगी। इसीलिए आयुर्वेद में इसे दीर्घजनक कहा गया है। यह पेट के अफारे को दूर कर आंत्र को उत्तेजित करता है।
अब इतने गुण जानने के बाद भी कोई अदरक का सेवन नहीं करे तो उसके लिए एक कहावत प्रसिद्ध है-बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
पुनश्चः अदरक को सूखा कर भी सेवन किया जा सकता है। अदरक को छील कर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लीजिए। फिर इनपर थोड़ा काला नमक और नींबू का रस या नींबू का सत बुरक दीजिए। इन्हें सूखा कर एक शीशी में भर कर रख लें। यह ऐसे मौसम में भी काम देगा जब अदरक बाजार में नहीं मिलता। नींबू और नमक से इसका स्वाद और गुण भी बढ़ जाते हैं।

      

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