Phone

+91-9839760662

Email

info@religionfactsandscience.com

Opening Hours

Mon - Fri: 7AM - 7PM

महर्षि कणाद के गति के नियम और
सर आइजक न्यूटन:

यूरोप को गतिकेनियम देने के लिए सरआइजकन्यूटन को याद किया जाता है , इन नियमों का वर्णन उन्होंने अपनी पुस्तक प्रिंसिपिया में किया था जो सन 1686 में प्रकाशित हुई।आज हम भी न्यूटन को ही गति के नियम बताने वाले उच्च_कोटि के वैज्ञानिक के रूप में जानते हैं।

अब से 600 ईसा पूर्व या लगभग 2600 वर्ष पहले भारत के वैज्ञानिक महर्षिकणाद की एक पुस्तक आयी जिसका नाम वैशेषिकसूत्र था। इस पुस्तक में भी गति के नियम जैसा कुछ लिखा हुआ था।

तो आइए दोनों के गति के नियम की तुलना करते हैं-

कणाद का गति का पहला नियम

1) वेगः निमित्तविशेषात कर्मणो जायते |

Meaning : Change of motion is due to impressed force.

न्यूटन का गति का पहला नियम-

The law stated that an object at rest tends to stay at rest and an object in motion tends to stay in motion with the same speed and in the same direction unless acted upon by an unbalanced force.

कणाद का गति का दूसरा नियम:

2) वेगः निमित्तापेक्षात कर्मणो जायते नियतदिक क्रियाप्रबन्धहेतु |

Meaning : Change of motion is proportional to the impressed force and is in the direction of the force.

न्यूटन का गति का दूसरा नियम-

Change of motion is proportional to the impressed force and is in the direction of the force.

कणाद का गति का तीसरा नियम:

3) वेगः संयोगविशेषविरोधी

Meaning: Action and reaction are equal and opposite.

न्यूटन का गति का तीसरा नियम-

Action and reaction are equal and opposite.
So Kanada’ s law are reported same as Newton’s

तो उपर्युक्त से स्पष्ट है कि भारत विश्व में उच्च शिक्षा के लिए जाना जाता था , भारतीयों के पास उच्च श्रेणी का विज्ञान था जिसको कॉपी करके न्यूटन जैसे लोग महान कहलाये जा रहे हैं।
जय परशुराम
जय सनातन धर्म
जय हिंदू संस्कार

Recommended Articles

Leave A Comment