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ढोल गँवार सूद्र पसु नारी।
सकल ताड़ना के अधिकारी।
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समुद्र ने यह चौपाई भगवान से कही,जिस चौपाई की समाज मे बहुत चर्चा हुई।इस चौपाई को लेकर बाबाजी के प्रति जिनको पूर्वाग्रह है वे लोग आलोचना किया करते हैं।लेकिन यहाँ कथा आई है कि इन लोगो को लकड़ी लेकर पीटो तो ही सीधे चलते हैं।ढोल को डंडा लेकर पीटो तभी वह बजेगा।गंवार को लकड़ी लेकर मारो तभी वह सीधा चलेगा।शूद्र को मारो तभी वह ठीक चलेगा।पशु को लकड़ी मारो तभी सीधा चलेगा।स्त्री भी लकड़ी के बिना सीधी राह नहीं चलती।यह समुद्र का कहना है।फरियाद करनी हो तो समुद्र के पास जाओ,क्योंकि यह बाबाजी का निवेदन नहीं है।यह समुद्र का निवेदन है।उसने कहा-स्त्री को लकड़ी लेकर मारो तभी वह सीधी चलती है।लोग आलोचना करते हैं कि बाबाजी ने स्त्रियों की निंदा की है।नारी को मारने की बात अच्छी है क्या?इसलिए लोग अर्थ बदलते हैं कि ताड़ने का अर्थ होता है शिक्षा देना, लेकिन ढोल को किसी शिक्षा दें?ढोल की आरती करो,अबीर गुलाल लगाओ और कहो बजो।क्या वह बजेगा?ताड़न का अर्थ संस्कृत में मारना, फटकारना ही होता है।तो स्त्री को क्यों मारने की बात कही?इसमे बाबाजी की निंदा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि सागर बोला है।सागर के निवेदन से बाबाजी को क्या लेना देना?रावण राम और लखन को बार बार तपस्वी कहता है तो क्या वह बाबाजी के शब्द हैं?वह रावण बोलता है, बाबाजी को क्या लेना देना?तो समुद्र यह बोला है।औऱ तीसरी बात-आज की स्त्रियों के लिए यह नहीं कहा गया है।वह तो त्रेता युग की स्त्रियों के लिए है।उस काल में ताड़न की बात कही।काल के संदर्भ में देखना चाहिए।और चौथी बात-यहाँ पाँच नहीं गिनाए,तीन ही गिनाए।ढोल को लकड़ी लेकर पीटो तभी वह बजेगा।शूद्र का विशेषण गँवार है।वह शूद्र और गँवार भी है।गँवार शूद्र के द्वारा यदि संस्कृति तोड़ी जाती हो तो उसे फटकारना चाहिए।और सभी नारियों को नहीं पशुनारी,जिस नारी का स्वभाव पशु जैसा हो उस नारी को मारने की बात है,सभी को नहीं।फिरभी दिमाग मे नहीं उतरे तो नारी का अर्थ केवल महिला नहीं होता।नृणाम अरि,नर का दुश्मन इति नारी-नर का दुश्मन काम है।तो नारी यानी कामना।तो कामिनी को नहीं, कामना को मारने की बात कही है,महिला को नहीं।
हिंदी भाषा मे ताड़ना का अर्थ होता है समझ जाना।हमने उसको पहली नजर देखा और हम उसे ताड़ गए।ताड़ना यानी उसको जानना,ठीक से समझना।यथार्थ जानना।तो बाबाजी इस अर्थ में कहते हैं कि इतने ब्यक्तियों के साथ समझदारी से काम लेना।ढोल को बिना चढाए,बिना सुर मिलाए बजाओगे तो वह टूट जाएगा।गँवार के साथ समझदारी से काम लेना।तुम गँवार को मारोगे, तो वह तुम्हें तीन गुना मरेगा उसका क्या भरोसा? इसलिए उसके साथ समझदारी से काम लेना।गाय को खाना देकर दुही जाय यह रस्सी बाँधकर दुही जाय।वैसे ही स्त्री के साथ अदब से ,आदर से काम लेना चाहिए।स्त्री समाज का यहाँ सम्मान है, आलोचना नहीं, क्योंकि ताड़ना का अर्थ है समझ लेना ,पा जाना,यथार्थ समझना।ताड़ने वाले कयामत की नजर रखते हैं।ताड़ने वाले यानी ज्ञानी लोग,समझदारी के साथ काम लेने वाले।यहाँ स्त्री समाज की निंदा नहीं बल्कि सम्मान किया गया है।
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जय श्री राम

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